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Chakravarti Rajagopalachari Biography | चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की जीवनी

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Gk Skill की इस पोस्ट में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (Chakravarti Rajagopalachari ) से जुड़े महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य जैसे उनकी व्यक्तिगत जानकारी, शिक्षा तथा करियर, उपलब्धि तथा सम्मानित पुरस्कार और भी अन्य जानकारियाँ। इस पोस्ट में दिए गए चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (Chakravarti Rajagopalachari ) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को एकत्रित किया गया है जिसे पढ़कर आपको प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी और आप इनके बारे में अपनी जानकारी बड़ा पाएंगे । Chakravarti Rajagopalachari Biography and Interesting Facts in Hindi.

स्मरणीय बिंदु:-

  • चक्रवर्ती राजगोपालाचारी राजाजी नाम से भी जाने जाते हैं
  • वे स्वतन्त्र भारत के द्वितीय गवर्नर जनरल और प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल थे

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की जीवनी (Chakravarti Rajagopalachari Biography ):-

पूरा नाम- चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

जन्म ( Born) – 10 दिसंबर 1878

मृत्यु (Died) – 25 दिसंबर 1972

जन्म स्थान – थोरापल्ली मद्रास

पिता – नलिन चक्रवर्ती

माता –  सिंगाराम्मा.

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (Chakravarti Rajagopalachari )

  • चक्रवर्ती राजगोपालाचारी राजाजी नाम से भी जाने जाते हैं
  • वे वकील, लेखक, राजनीतिज्ञ और दार्शनिक थे
  • वे स्वतन्त्र भारत के द्वितीय गवर्नर जनरल और प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल थे
  • 10 अप्रैल 1952 से 13 अप्रैल 1954 तक वे मद्रास प्रांत के मुख्यमंत्री रहे
  • वे दक्षिण भारत के कांग्रेस के प्रमुख नेता थे, किन्तु बाद में वे कांग्रेस के प्रखर विरोधी बन गए तथा स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की
  • वे गांधीजी के समधी थे। (राजाजी की पुत्री लक्ष्मी का विवाह गांधीजी के सबसे छोटे पुत्र देवदास गांधी से हुआ था।)
  • उन्होंने दक्षिण भारत में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए बहुत कार्य किया
  • 1937 में राजाजी के नेतृत्व में कांग्रेस ने कौंसिल का चुनाव जीता। इन्हें कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी के रूप में भी चुना गया
  • अंतिम गवर्नर माउंटबेटन के बाद राजगोपालाचारी भारत के पहले गवर्नर बने थे
  • इनका जन्म 10 दिसंबर 1878 को मद्रास के थोरापल्ली गांव में वैष्णव ब्राह्मण परिवार में हुआ था
  • इनके पिता का नाम नलिन चक्रवर्ती था
  • पांच साल के होने पर इनका परिवार होसूर चला आया
  • इनकी प्राथमिक शिक्षा होसुर के सरकारी स्कूल से हुई
  • 1894 में बेंगलुरु के सेंट्रल कॉलेज से स्नातक किया
  • फिर 1897 में मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज से कानून की पढ़ाई
  • 1897 में इनका विवाह अलामेलू मंगलम्मा से हुआ
  • वकालत से इन्होंने खूब नाम कमाया। फिर राजनीति में आए और इसके बाद स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए
  • 28 साल की उम्र में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े
  • गांधी के छुआछूत आंदोलन और हिंदू-मुस्लिम एकता के कार्यक्रमों ने इन्हें बहुत प्रभावित किया। इसलिए स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय होने पर राजाजी गांधी जी के अनुयायी बन गए
  • 1930 में जब गांधी जी ने दांडी मार्च किया तो इन्होंने नागपट्टनम के पास वेदरनयम में नमक कानून भी तोड़ा। इसके लिए इन्हें जेल भी हुई
  • मंदिरों में जहां दलित समुदाय का जाना मना था, इसका इन्होंने जमकर विरोध किया। इन्हीं के फलस्वरूप मंदिरों में दलितों का प्रवेश संभव हो सका
  • 1937 में राजाजी के नेतृत्व में कांग्रेस ने कौंसिल का चुनाव जीता। इन्हें कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी के रूप में भी चुना गया
  • अंतिम गवर्नर माउंटबेटन के बाद राजगोपालाचारी भारत के पहले गवर्नर बने थे
  • 1950 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार में इन्हें गृहमंत्री भी बनाया गया
  • 1952 में राजाजी को मद्रास प्रांत का मुख्यमंत्री बनाया गया वे 1952-1954 तक मुख्यमंत्री रहे
  • राजाजी दक्षिण भारत के कांग्रेस के प्रमुख नेता थे। किंतु पंडित नेहरू से कई मसलों पर असहमति होने के कारण वे कांग्रेस पार्टी से अलग हो गए
  • कांग्रेस से अलग होकर 1959 में ‘स्वतंत्र पार्टी’ का गठन किया
  • चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान रहा
  • देश के गैर-हिंदीभाषी राज्यों में से एक तत्कालीन मद्रास प्रांत में हिंदी की शिक्षा अनिवार्य कराने का श्रेय उन्हें जाता है
  • राजाजी का मानना था कि हिंदी ही एकमात्र भाषा है, जो देश को एक सूत्र में बांध सकती है
  • राजनीतिज्ञ के साथ लेखक भी
  • राजगोपालाचारी तमिल के साथ-साथ अंग्रेजी के भी बेहतरीन लेखक थे
  • जेल में रहने के दौरान इन्होंने 1922 में ‘मेडिटेशन इन जेल’ के नाम से एक किताब भी लिखी
  • वे सलेम लिटरेरी सोसायटी के संस्थापक थे। इन्होंने कई कहानियां भी लिखी
  • इतना ही नहीं कुछ दिनों तक महात्मा गांधी के अखबार ‘यंग इंडिया’ का संपादन भी किया
  • 1951 में, राजाजी ने अंग्रेजी में महाभारत का एक संक्षिप्त वर्णन लिखा, इसके बाद 1957 में रामायण का
  • 1961 में, इन्होंने कांबर के तमिल रामायण का अंग्रेजी में अनुवाद किया था
  • 1958 में, इन्हें ‘रामायण- चक्रवर्ती थिरुमगम्’ के तमिल भाषा में काम करने के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया
  • स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बाद तक देश की सेवा करने के लिए चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को 1954 में भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया
  • बीमारी के चलते 92 वर्ष की उम्र में 25 दिसंबर 1972 को निधन होगया

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Pushpendra Patel

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